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राजनीतिक भागीदारी के बिना महापुरुषों को नहीं मिलता सम्मान : संजय गुर्जर

राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाईन टाइम्स।
नोएडा, गौतमबुद्ध नगर। भारत बचाओ, संविधान बचाओ आंदोलन एवं पीडीएमएम गठबंधन के प्रमुख संजय गुर्जर ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसके इतिहास, संघर्ष और महापुरुषों से होती है। जो समाज अपने पूर्वजों के त्याग, बलिदान और गौरवशाली इतिहास को भुला देता है, वह धीरे-धीरे सामाजिक और राजनीतिक रूप से कमजोर हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज अपने महापुरुषों के सम्मान और अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज बुलंद करे।
संजय गुर्जर ने कहा कि 1857 की प्रथम स्वतंत्रता क्रांति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर समाज का ऐतिहासिक योगदान रहा है। मेरठ, गाजियाबाद, दादरी, बुलंदशहर और आसपास का पूरा क्षेत्र अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का मजबूत केंद्र था। उस दौर में गांव-गांव में क्रांति की अलख जगी हुई थी और लोग देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार रहते थे। उन्होंने कहा कि धनसिंह कोतवाल, विजयसिंह पथिक और राव उमरावसिंह जैसे महापुरुषों ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने का कार्य किया था।
उन्होंने कहा कि सिकंदराबाद के निकट स्थित प्रेमपुर जैसे छोटे गांवों ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय गुर्जर समाज के गांव अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति के केंद्र बने हुए थे। लोगों में मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान के लिए संघर्ष करने की अद्भुत भावना थी।
संजय गुर्जर ने कहा कि आज देशभर में 10 मई 1857 की क्रांति को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो गर्व की बात है। लेकिन केवल कार्यक्रम आयोजित करने से समाज को उसका अधिकार और सम्मान नहीं मिलेगा। इसके लिए राजनीतिक हिस्सेदारी और सत्ता में मजबूत दखल जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन समाजों की राजनीति में मजबूत भागीदारी होती है, उनके महापुरुषों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान मिलता है।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि धनसिंह कोतवाल, विजयसिंह पथिक और राव उमरावसिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए। साथ ही उनकी जीवनी को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और महापुरुषों के संघर्ष को जान सके।
संजय गुर्जर ने वर्तमान सरकार में सक्रिय गुर्जर नेताओं से भी अपील की कि वे इस मांग को मजबूती से केंद्र और राज्य सरकार के सामने रखें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समाज की भावनाओं की अनदेखी की, तो प्रदेशभर में बड़ा जनआंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज अब अपने महापुरुषों के सम्मान के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है और आने वाले समय में इस विषय को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाएगा।

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