ग्रेटर नौएडा। गौतमबुद्ध नगर के बोड़ाकी क्षेत्र में प्रस्तावित एमएमटीएच प्रोजेक्ट के लिए किए जा रहे भूमि अर्जन को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। बोड़ाकी गांव निवासी एडवोकेट बलराज भाटी ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा बोड़ाकी, पल्ला, पाली, कटेहरा, तिलपता, दादरी, चमरावली और रामगढ़ सहित सात गांवों की लगभग 47.38 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इस संबंध में 28 जून 2025 को रेलवे एक्ट 2008 की धारा 20ए के तहत अधिसूचना जारी की गई थी।
किसानों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कई कानूनी नियमों की अनदेखी की जा रही है। विशेष रूप से आर एंड आर पॉलिसी 2007 के तहत आवश्यक सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट सर्वे नहीं कराया गया है और न ही किसानों से मकानों के अर्जन के लिए सहमति ली गई है। वहीं, शिफ्टिंग पॉलिसी को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसानों का कहना है कि पॉलिसी में केवल “रिहायशी” लोगों को लाभ देने की बात कही गई है, जिससे उन किसानों को नुकसान हो सकता है जिनकी जमीन खतौनी में कृषि के रूप में दर्ज है, भले ही वे वर्षों से वहां निवास कर रहे हों।
इसके अलावा, आर एंड आर प्रशासक और आयुक्त की नियुक्ति में भी नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है। किसानों का कहना है कि यह नियुक्तियां विधि के अनुरूप केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से अधिसूचना के जरिए होनी चाहिए थीं, जो नहीं हुईं।
इन्हीं मुद्दों को लेकर किसान जिलाधिकारी मेधा रूपम से मिले और भूमि अर्जन को निरस्त करने की मांग की। जिलाधिकारी ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा और जल्द ही प्रशासन व किसानों के बीच सीधी बैठक आयोजित कर सभी विवादों का समाधान किया जाएगा।
किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक पारदर्शी और न्यायसंगत नीति नहीं बनती, उनका विरोध जारी रहेगा।
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