नई दिल्ली। विश्व हिंदी सम्मेलन के उपलक्ष्य में 10 दिसम्बर 2026 को “हिन्दी प्रेमी प्रवासी भारतीयों के साथ एक परिचर्चा” विषय पर एक विशेष वर्चुअल वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व भर में बसे हिंदी प्रेमी प्रवासी भारतीयों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस परिचर्चा में नार्वे, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, मॉरीशस, सूरीनाम और श्रीलंका जैसे देशों से जुड़े हिंदीविद और विदुषियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए राष्ट्रभाषा हिंदी के वैश्विक स्वरूप एवं स्वीकार्यता पर सारगर्भित वक्तव्य दिए।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सतीश कुमार शास्त्री द्वारा किया गया। वेबिनार की शुरुआत फोनिक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. मनीष पांडेय के कहानी पाठ से हुई, जिसने उपस्थित श्रोताओं में भाषा के प्रति आत्मीय भाव को जाग्रत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली के विभागाध्यक्ष प्रो. यशवीर सिंह ने की।
इस अवसर पर एम.एम.एच. कॉलेज गाजियाबाद के प्रो. डॉ. राकेश राणा ने प्रवासी भारतीयों द्वारा हिंदी के वैश्विक विस्तार, संवर्धन और साहित्यिक योगदान पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रवासी समुदाय न केवल भारतीय संस्कृति का वाहक है बल्कि हिंदी को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में सामुदायिक रेडियो स्टेशन से जुड़े बी.के. यशवंत पाटिल, जो इसके अध्यक्ष हैं, और F.R.C.S के महासचिव डॉ. डी.पी. सिंह का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागी वक्ताओं एवं विद्वानों का आभार यशवंत पाटिल द्वारा व्यक्त किया गया।
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