हरिद्वार/ नई दिल्ली । देश के प्राचीन सनातन परंपराओं के प्रमुख केंद्र जूना अखाड़ा द्वारा गुरुवार को भव्य वैदिक समारोह में स्वामी चक्रपाणि महाराज का जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर विधिवत अभिषेक किया गया। पद ग्रहण के उपरांत उनका नया नाम स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि महाराज घोषित हुआ।
यह अभिषेक स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के निर्देशन तथा श्रीमहंत हरि गिरि महाराज और श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ। पंच गुरु परंपरा के अंतर्गत विभिन्न संतों ने चोटी गुरु, भगवा गुरु, रुद्राक्ष गुरु, विभूति गुरु एवं लंगोटी गुरु के रूप में उन्हें दीक्षा प्रदान की।
सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने भी समारोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए उन्हें रुद्राक्ष गुरु के रूप में आशीर्वाद प्रदान किया। उनके संबोधन में सनातन धर्म की एकता, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरण पर विशेष बल दिया गया।
ब्रह्मकुंड घाट पर गंगा पूजन, भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना तथा हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मायादेवी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक सम्पन्न हुआ। समारोह में अनेक संत-महात्माओं और अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।
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