भोपाल। कायस्थ समाज द्वारा आयोजित “कायस्थम–2026” कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार 11 जनवरी को राजधानी भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन, अंजनी सभागार में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सनातन सम्राट, अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा श्री चित्रगुप्त अखाड़ा एवं संत महासभा के संस्थापक अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी चक्रपाणि महाराज को “कायस्थ गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रवादी विचारधारा, सनातन धर्म रक्षा, सामाजिक जागरण, आतंकवाद विरोध एवं समाजसेवा के क्षेत्र में दिए गए ऐतिहासिक योगदान के लिए प्रदान किया गया।
समारोह का आयोजन कायस्थ स्तंभ संस्था द्वारा किया गया, जिसके आयोजक प्रलय श्रीवास्तव रहे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री माननीय विश्वास सारंग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर महर्षि महेश योगी के कृपापात्र ब्रह्मचारी गिरिश ने विधिवत पटका, माल्यार्पण एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर स्वामी चक्रपाणि महाराज का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में आर.एन. श्रीवास्तव (चीफ एडिटर, स्वदेश चैनल), वेद आशीष श्रीवास्तव तथा अजय श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
मुख्य संबोधन में मंत्री विश्वास सारंग ने स्वामी चक्रपाणि जी महाराज के धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित में किए गए योगदान की सराहना करते हुए कहा कि “धर्म और राष्ट्र के प्रति स्वामी जी का दृष्टिकोण हमें नई दिशा देता है और हमें उनके मार्गदर्शन से लाभ मिलता रहेगा।” वहीं ब्रह्मचारी गिरिश जी ने कहा कि “महाराज जी की छत्रछाया में सनातन समाज को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।”
अपने संबोधन में स्वामी चक्रपाणि महाराज ने महर्षि महेश योगी एवं ब्रह्मचारी गिरिश का उल्लेख करते हुए कहा कि “सनातन धर्म की वैदिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का कार्य अथक प्रयासों से आगे बढ़ रहा है और यह समय समाज में एकता व राष्ट्रनिर्माण का है।”
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, स्वामी चक्रपाणि महाराज श्रीराम जन्मभूमि मामले में प्रमुख पक्षकार रहे तथा न्यायिक लड़ाई हेतु अपनी निजी भूमि तक समर्पित की। आतंकवाद एवं राष्ट्रविरोधी तत्त्वों के खिलाफ संघर्ष के दौरान उन्होंने डॉन दाऊद इब्राहिम की नीलाम हुई कार को सार्वजनिक रूप से नष्ट कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश दिया। वहीं बाबर के वंशजों से हिंदू समाज के समक्ष लिखित और मौखिक क्षमा मंगवाने की ऐतिहासिक पहल भी उनके नेतृत्व में हुई।
समापन में “सनातन धर्म की जय”, “अधर्म का नाश हो” तथा “भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की जय” जैसे गगनभेदी नारों के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
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