दिल्ली। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के सात प्रदेशों से आए प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी से उनके दिल्ली स्थित आवास पर शिष्टाचार एवं संगठनात्मक विषयों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक का नेतृत्व महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र भाटी ने किया। बैठक की अध्यक्षता मोहनलाल वर्मा ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी सुनील भाटी ने निभाई। इस अवसर पर महासभा के पदाधिकारियों ने सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी को महासभा का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनका आभार व्यक्त किया। बैठक में संगठन की सामाजिक, शैक्षिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
गौतमबुद्धनगर के जिला अध्यक्ष अशोक भाटी ने महासभा का परिचय देते हुए बताया कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा देश की आज़ादी से भी पूर्व स्थापित एक ऐतिहासिक संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1908 में हुई थी। उन्होंने कहा कि महासभा शिक्षा, सामाजिक उत्थान, जनसेवा एवं समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। साथ ही शिक्षा सहायता, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद, सामाजिक जागरूकता अभियान तथा युवाओं के मार्गदर्शन जैसे कार्यक्रमों की जानकारी दी।
बैठक का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के लिए एक स्थायी कार्यालय भवन की मांग को लेकर चर्चा करना रहा। इस पर सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मांग को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि शीघ्र ही विभागीय प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव को डीडीए के समक्ष रखा जाएगा और आवश्यक स्वीकृति के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
बैठक में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं महाराष्ट्र से आए प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। प्रमुख रूप से राजपाल कसाना, रामकेश चपराना, राजेंद्र लोहिया, सुभाष गुर्जर, बृजमोहन गुर्जर, होतम सिंह गुर्जर, राम बहादुर सिंह गुर्जर, देवेंद्र सिंह गुर्जर, शैतान सिंह गुर्जर, देवराज भड़ाना, मनोज गुर्जर, प्रदीप गुर्जर, के.पी. मावी, सुरेंद्र नागर, कर्मवीर तोमर, विजयपाल कसाना, बबली कसाना, जयप्रकाश विकल, डॉ. लालबहार, शोबिंद्र भाटी, के.पी. कसाना, मनवीर सिंह नागर, प्रमोद भाटी, नामित भाटी, अशोक भाटी, गजेंद्र रेक्सवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह बैठक समाज की एकजुटता, संगठन की मजबूती और भविष्य की योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण व सकारात्मक पहल के रूप में देखी जा रही है।
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