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फिल्म ‘गोदान’ : एक कहानी जो सोच बदल दे, 6 फरवरी 2026 से सिनेमाघरों में

कर्मवीर आर्य संवाददाता राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाइन टाइम्स गौतम बुद्ध नगर। नोएडा। भारतीय सिनेमा में सामाजिक सरोकारों को नई दिशा देने आ रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘गोदान’ 6 फरवरी 2026 से देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो गयी है। यह फिल्म केवल एक कथा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, समाज और विज्ञान के बीच चल रहे संवाद को गहराई से सामने रखने वाली एक सशक्त दृष्टि है।
फिल्म ‘गोदान’ उस प्रश्न को उठाती है, जो आज के विकासशील भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है—क्या आधुनिकता और विकास की दौड़ में हम अपनी जड़ों, परंपराओं और किसानों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं? यह कहानी बताती है कि गाय केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वैज्ञानिक सोच का भी अहम हिस्सा है।
फिल्म में किसान, परंपरा और आधुनिक सोच के बीच संघर्ष और संतुलन को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया है। ‘गोदान’ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या विकास का रास्ता अपनी मूल आत्मा को खोकर तय किया जाना चाहिए या फिर परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं।
सशक्त अभिनय, भावनात्मक संवाद और प्रभावशाली दृश्यांकन के साथ यह फिल्म समाज के हर वर्ग से जुड़ने का प्रयास करती है। फिल्म का संदेश स्पष्ट है—संस्कृति और विज्ञान के संगम से ही सशक्त और संतुलित समाज का निर्माण संभव है।
‘गोदान’ केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक विमर्श है, जो दर्शकों को देखने, समझने और सोचने के लिए प्रेरित करता है। यह फिल्म उन सभी लोगों के लिए है, जो समाज, संस्कृति और भविष्य को लेकर संवेदनशील सोच रखते हैं।
देखिए, समझिए, सोचिए—‘गोदान’, केवल फिल्म नहीं, एक दृष्टि। 

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