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साधारण किसान परिवार से दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर तक: डॉ. गजेंद्र सिंह पोसवाल की प्रेरणादायक सफलता

कमल प्रजापति प्राभारी रष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाईन टाइम्स, नई दिल्ली।
 

मेरठ / नई दिल्ली । यह कहावत कि "जब हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती" डॉ. गजेंद्र सिंह पोसवाल के जीवन पर पूरी तरह चरितार्थ होती है। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित महाविद्यालय में प्रोफेसर पद पर चयनित होना उनकी कड़ी मेहनत, लगन और संघर्ष का जीवंत उदाहरण है।

जनपद मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नवीपुर, अमानतनगर निवासी तथा स्वर्गीय श्री रुग्गन सिंह पोसवाल के सुपुत्र डॉ. गजेंद्र सिंह पोसवाल ने अपनी प्रतिभा और अथक परिश्रम के बल पर शिक्षा जगत में विशिष्ट पहचान बनाई है। इससे पहले वे दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे। बाद में उन्होंने देशबंधु कॉलेज में असिस्टेंट एवं एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएँ देकर विद्यार्थियों और संस्थान का गौरव बढ़ाया।

डॉ. पोसवाल का शोध कार्य मुख्य रूप से कैंसर के कम लागत वाले प्रभावी उपचार पर केंद्रित है। इस महत्वपूर्ण विषय पर उनके 20 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। हाल ही में उनके कई शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध केमिस्ट्री सेलेक्ट जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। इसके अतिरिक्त वे 32 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों में अपने शोध प्रस्तुत कर चुके हैं। वे दो प्रतिष्ठित वैज्ञानिक समितियों के लाइफ टाइम मेंबर हैं तथा अनेक शोध पत्रिकाओं के एडिटोरियल बोर्ड में भी सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। देशबंधु कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की कई महत्वपूर्ण समितियों में भी उन्होंने जिम्मेदार भूमिका निभाई है।

अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय डॉ. पोसवाल अपनी स्वर्गीय माता किरनवती, स्वर्गीय मामा महेंद्र सिंह चंदेल एवं स्वर्गीय विजेंद्र सिंह चंदेल, निवासी ग्राम सीकरी खुर्द (मोदीनगर) को देते हैं। उनका कहना है कि प्रारंभिक शिक्षा के दौरान इन सभी ने उन्हें सही मार्गदर्शन, प्रेरणा, साहस और नैतिक संबल प्रदान किया, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। वे अपनी धर्मपत्नी संगीता रानी, निवासी ग्राम बड़पुरा (दादरी), के प्रति भी विशेष आभार व्यक्त करते हैं, जिनके निरंतर सहयोग, विश्वास और प्रोत्साहन ने हर कठिन परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया। साथ ही वे अपने सभी भाई-बहनों के सहयोग को भी अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं।

डॉ. गजेंद्र सिंह पोसवाल की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे मेरठ क्षेत्र और पोसवाल समाज के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता आज ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और शिक्षा के प्रति समर्पण से हर सपना साकार किया जा सकता है। डॉ. पोसवाल की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, संघर्ष और सफलता का एक उज्ज्वल उदाहरण है।

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