जयपुर। जयपुर में आयोजित भव्य संत संसद में देशभर से आए संत-महात्माओं और आध्यात्मिक संस्थाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी महाराज, आध्यात्मिक चिकित्सा के माध्यम से जनसेवा कर रहे श्री करौली सरकार शंकर महादेव जी तथा पंडोखर धाम के पीठाधीश्वर पंडित श्री गुरु शरण शर्मा जी महाराज की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। तीनों पूज्य संतों का आत्मीय मिलन और परस्पर सम्मान का भाव उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
कार्यक्रम के उपरांत तीनों संतों ने आपसी स्नेह और सम्मान का परिचय देते हुए एक-दूसरे को अपने हाथों से मिष्ठान खिलाकर प्रेम, समन्वय और सद्भाव का संदेश दिया। यह भावपूर्ण दृश्य उपस्थित जनसमूह के साथ-साथ समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश बनकर उभरा। वर्तमान समय में जहां विचारों के मतभेद के कारण समाज में कटुता और विभाजन देखने को मिलता है, वहीं संतों का यह आत्मिक मिलन संपूर्ण मानवता के लिए एकता और सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर बताया गया कि पंडोखर धाम द्वारा 2 अप्रैल से 20 अप्रैल तक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस श्रृंखला में एक दिन संत सम्मेलन भी आयोजित होगा, जिसमें राष्ट्र रक्षा, धर्म रक्षा, गौ रक्षा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और आतंकवाद के विरोध जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। देशभर से संत-महात्माओं की भागीदारी से यह सम्मेलन समाज को नई दिशा देने का प्रयास करेगा।
संत संसद का यह मिलन यह संदेश देता है कि जब संत समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तो राष्ट्र और विश्व के कल्याण का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है।
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