ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा को आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में गिना जाता है। ऊंची-ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें, आधुनिक अस्पताल और बड़े-बड़े शिक्षण संस्थान इस विकास की पहचान बन चुके हैं। लेकिन इसी चमक-दमक के बीच प्राधिकरण क्षेत्रों में आने वाले गांवों की स्थिति एक कड़वी सच्चाई बयां करती है—यह विकास गांवों के लिए कहीं न कहीं “विनाश” साबित हो रहा है।
जब से प्राधिकरणों द्वारा विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, तब से गांवों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। ईटेढ़ा, हैबतपुर, रोजा जलालपुर, सदलापुर, बिसरख, आमका, दतावली, बोडाकी, तुगलपुर, रामपुर, सलारपुर, भंगेल, झटटा, मोहियापुर और कासना जैसे दर्जनो गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। संपर्क मार्गों की हालत बेहद खराब है, सड़कों पर गड्ढे और जलभराव आम समस्या बन चुके हैं।
सीवरेज व्यवस्था का हाल और भी दयनीय है। एक बार पाइपलाइन डालने के बाद वर्षों तक उसकी सफाई नहीं होती, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। हाल ही में जलालपुर गांव में एक शवयात्रा को पानी भरे रास्ते से गुजरना पड़ा, जो प्रशासन की लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। वहीं तिलपता गांव रोजाना जाम और प्रदूषण की मार झेल रहा है, जिससे लोगों में बीमारियां बढ़ रही हैं।
प्राधिकरण द्वारा किसानों के लिए निजी स्कूलों और अस्पतालों में 10% आरक्षण की बात कही जाती है, लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित नजर आती है। जिन किसानों की जमीन लेकर आलीशान कॉलोनियां और हाईराइज इमारतें बनाई गईं, वही किसान आज रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जो कभी अपनी जमीन के मालिक थे, वे आज दूसरों के यहां चौकीदारी करने को मजबूर हैं।
गांवों में सार्वजनिक शौचालय, पार्क, खेल मैदान और स्टेडियम जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। आम आदमी के लिए न तो रहने की बेहतर व्यवस्था है और न ही जीवन स्तर सुधारने की कोई ठोस योजना दिखाई देती है। एक ओर अमीरों के लिए आलीशान कोठियां और सुविधाएं हैं, तो दूसरी ओर गांवों में रहने वाले लोग बदहाल जीवन जीने को मजबूर हैं।
यह सवाल उठता है कि क्या यही विकास है? क्या प्राधिकरणों की जिम्मेदारी केवल शहरों को संवारना है, या फिर उन गांवों को भी बराबरी से विकसित करना है, जिनकी जमीन पर यह आधुनिक शहर खड़े हुए हैं?
यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह असंतोष आगे चलकर बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। जरूरत है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गांवों के विकास के लिए ठोस और प्रभावी योजनाएं बनाएं, ताकि “विकास” का लाभ हर वर्ग तक पहुंच सके।
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