ग्रेटर नोएडा/गौतमबुद्ध नगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को गौतमबुद्ध नगर में “प्रमुख जन गोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम शारदा विश्वविद्यालय स्थित एपीजे अब्दुल कलाम हॉल में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता, संस्कृति संरक्षण और सेवा कार्यों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सह प्रांत प्रचारक मेरठ प्रांत श्री आनंद जी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र के विकास के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से शुरू होकर समाज और राष्ट्र निर्माण तक जाता है। उन्होंने भारत की प्राचीन संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सभ्यता विश्व को दिशा देने की क्षमता रखती है।
इस अवसर पर भारत विकास परिषद के कोषाध्यक्ष श्री महेश गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं—बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और विपिन चंद्र पाल—का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में जागरूकता और संगठन ही राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं से समाज सेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में आगे आने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मीरा चौधरी (एडवोकेट) ने महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का स्वरूप माना गया है। आज आवश्यकता है कि महिलाएं अपने संस्कारों और आत्मविश्वास के साथ समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि मजबूत परिवार व्यवस्था और संस्कारित पीढ़ी ही देश को आगे बढ़ाने का आधार बनती है।
इस अवसर पर शिवकुमार, राजकुमार आर्य, नेमपाल सिंह,मोहित शाहनी, शशांक, अनित और राधाचरण सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र निर्माण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति से सेवा, संस्कार और संगठन के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया।
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