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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में “वस्तु एवं सेवा कर तथा समावेशी विकास” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

कर्मवीर आर्य संवाददाता राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाइन टाईम्स गोतमबुद्ध नगर।
ग्रेटर नोएडा, 28 मार्च 2026।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन विद्यालय द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “नेक्स्ट जेनरेशन वस्तु एवं सेवा कर तथा समावेशी विकास: उभरते सामाजिक-आर्थिक आयाम” का द्वितीय दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर से शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विषय-विशेषज्ञों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। द्वितीय दिवस पर आयोजित तकनीकी सत्रों में वस्तु एवं सेवा कर, राजकोषीय नीति, अनुपालन तंत्र तथा समावेशी आर्थिक विकास से संबंधित विविध शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञों के मध्य सार्थक अकादमिक विमर्श हुआ, जिससे समकालीन आर्थिक मुद्दों पर गहन विचार-विनिमय संभव हुआ। प्रथम तकनीकी सत्र में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के प्रो. शाहिद अहमद एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीप ने शोधपत्रों पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) भूपेंद्र सोआम, निदेशक, जीएनआईओटी प्रबंधन अध्ययन संस्थान, ग्रेटर नोएडा द्वारा की गई। इस सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. आर. पी. तुलसियन तथा गल्गोटियास विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा की प्रो. मंजू दहिया ने अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। तृतीय तकनीकी सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय से प्रो. आज़ाद सिंह तथा दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डीन प्रो. सुनील कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। समापन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. सुनील कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह तथा अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. राजीव वर्शनेय की गरिमामयी  मार्गदर्शन रहया प्रो. सुनील कुमार ने वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने हेतु सतत शोध, नीतिगत नवाचार एवं संस्थागत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. राजीव वर्शनेय, अधिष्ठाता (शैक्षणिक), ने अपने जीवनानुभवों के आधार पर जीएसटी से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं पर महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक विचार साझा किए, जिससे उपस्थित प्रतिभागियों को नीति एवं व्यवहारिक पक्षों की गहन समझ प्राप्त हुई। कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक डॉ. ओमबीर सिंह डॉ. इन्दु उप्रेती के निर्देशन में संपन्न हुआ। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुभोजीत बनर्जी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद सहित सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस संगोष्ठी ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की उच्च गुणवत्ता वाले शोध, अकादमिक उत्कृष्टता एवं नीतिगत संवाद को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

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