नोएडा। सामाजिक कार्यकर्ता बीसी प्रधान ने बताया कि गांव बरौला, सेक्टर-49 निवासी किसान चौधरी प्रेम सिंह को अपनी जमीन के मुआवजे के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा, लेकिन आखिरकार 43 वर्षों बाद उन्हें न्याय मिल गया। वर्ष 1976 में नोएडा प्राधिकरण द्वारा उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जिसके बदले उस समय मात्र ₹3 प्रति मीटर की दर से मुआवजा दिया गया था। किसान का कहना था कि उनकी जमीन बेहद कम दर पर ली गई है, इसलिए उन्होंने 1983 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।
लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप जैन ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए किसान के पक्ष में आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अधिग्रहित जमीन का मुआवजा अब ₹28.12 प्रति मीटर की दर से दिया जाए। इस फैसले से न केवल चौधरी प्रेम सिंह के परिवार में खुशी का माहौल है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों में भी उम्मीद जगी है।
इस मामले को लेकर बरौला के किसान नेता चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि यह फैसला किसानों के संघर्ष और धैर्य की जीत है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों के जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं, और जिन्हें अपने केस के लिए सर्टिफाइड कॉपी की आवश्यकता हो, वे उनसे संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और यदि उन्हें लगता है कि जमीन का मुआवजा कम दिया गया है, तो कानूनी रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटना चाहिए। हाईकोर्ट का यह फैसला क्षेत्र के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
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