बच्चे स्वंय पहचाने गुड टच और बैड टच में अंतर ।

बच्चों ने सीखे गुड टच और बैड टच के गुण, फ्यूचर लाइन टाईम्स,दिनांक अक्टूबर 23,2019,संवाददाता अनिल मिश्र,प्रयागराज  : जिला राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिला मानसिक स्वास्थ्य टीम द्वारा एक नयी मुहीम की शुरुवात की गयी। जिसमें गुड टच,बैड टच पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन समेकित शिक्षा अभियान के साथ प्राथमिक विद्यालय, बैरहना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप डॉ. वी.के मिश्रा नोडल एन.सी.डी सेल अपर मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा किया गया उन्होंने दिव्यांग बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की जानकारी एवं बचाव की महत्वता को अहम बताया एवं ऐसे प्रयासों की प्रशंसा की। 
  उन्होंने इस कार्यशाला के आयोजन हेतु सराहा व ऐसे उत्पीड़न की निंदा करते हुए उसके बचाव के बारे में अपने अनुभव को शेयर किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चो को यौन उत्पीड़न हेतु जागरूक कर उन्हें यौन उत्पीड़न से बचाना हैं। कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. इशान्य राज नैदानिक मनोवैज्ञानिक ने बच्चो को बड़े ही सरल तरीके फोटो, एक्शन, कहानी के माध्यम से बच्चो को शरीर के प्राइवेट बॉडी पार्ट, टच के प्रकार, (गुड व बैड) सेफ सर्कल तथा बचाव के उपाय के बारे में विस्तार से समझाया। डॉक्टर डॉ राकेश पासवान मनोचिकित्सक परामर्शदाता ने  कार्यशाला का संचालन किया एवं बचपन में होने वाले विभिन्न प्रकार के मानसिक परेशानियों के बारे में विस्तार से बताया एवं उसके उपचार की चर्चा की।


क्या हैं सेफ सर्कल 


बच्चो के सेफ सर्कल के अन्दर अभिभावक मम्मी, पापा, दादा, दादी , तथा डॉक्टर को सम्लित किया गया।


पहचाने बैड टच 


शरीर के किसी भी पार्ट को छूने से गुस्सा आना, अच्छा न लगना, जबरदस्ती पकड़ना, गोद में बैठना, होठ, चेस्ट, टांगो को हीप को छूना।  


  क्या करें ?
  बच्चो को बताया गया कि यदि उन्हें उनके आस-पड़ोस, बस ड्राइवर या कोई अंजन व्यक्ति कभी भी ऐसा करे तो आपको जोर से छव् चिल्लाना हैं और तुरंत अपने अभिभावक मम्मी पापा को जरुर बताये। समेकित शिक्षा की ऑर्डिनेटर सुश्री श्रद्धा गोबराले एवं रिसोर्स टीचर श्रीमती पूनम सिंह कार्यशाला की आयोजन में योगदान दिया


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