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महर्षि दयानंद पर टिप्पणी को लेकर महेंद्र आर्य की राजकुमार भाटी को खुली चुनौती, बोले—शास्त्रार्थ करें या आर्य समाज से क्षमा मांगें

मनोज तोमर ब्यूरो चीफ राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाईन टाइम्स गौतम बुद्ध नगर।

ग्रेटर नोएडा। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों और उनके सिद्धांतों को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी की कथित टिप्पणी पर आर्य समाज से जुड़े शास्त्रार्थ महारथी महेंद्र सिंह आर्य ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। महेंद्र आर्य ने कहा कि उन्होंने भाटी की टिप्पणी से संबंधित वीडियो देखा है, जिसमें विवाह तथा नवजात शिशु को छह दिन तक जननी का दूध पिलाने जैसे विषयों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

महेंद्र आर्य का कहना है कि इन विषयों पर राजकुमार भाटी से पहले भी ग्राम नियाना में गजराज आर्य के निवास पर शास्त्रार्थ हो चुका है। उनके अनुसार उस कार्यक्रम में सुखबीर प्रधान पल्ला और अधिवक्ता मुकेश दुजाना की अध्यक्षता में दोनों पक्षों के बीच विस्तार से वैचारिक बहस हुई थी। महेंद्र आर्य ने दावा किया कि उस शास्त्रार्थ में भाटी को अपने पक्ष के समर्थन में कठिनाई का सामना करना पड़ा था और सभा के अनुरोध पर बराबरी का निर्णय सुनाकर विवाद को समाप्त किया गया था।

महेंद्र आर्य ने कहा कि उस शास्त्रार्थ से जुड़े सुखबीर प्रधान पल्ला, अधिवक्ता मुकेश दुजाना और अन्य उपस्थित लोग आज भी इस पूरे घटनाक्रम के साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि यदि राजकुमार भाटी को अपने विचारों पर पूरा विश्वास है तो पुराने विषयों पर दोबारा सार्वजनिक शास्त्रार्थ के लिए सामने आना चाहिए।

आर्य ने चुनौती देते हुए कहा, “यदि आपको अपने तर्क और विचारों पर विश्वास है तो शास्त्रार्थ की चुनौती शीघ्र स्वीकार करें। तर्क, प्रमाण और शास्त्रों के आधार पर खुली चर्चा होनी चाहिए, ताकि समाज स्वयं तय कर सके कि सत्य किस पक्ष में है।”

महेंद्र सिंह आर्य ने यह भी कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय तथ्यों, वेदों और प्रमाणिक स्रोतों का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आर्य समाज अपने वैचारिक सिद्धांतों के पक्ष में तर्कपूर्ण और शांतिपूर्ण संवाद के लिए सदैव तैयार है।

अंत में महेंद्र सिंह आर्य ने राजकुमार भाटी से कहा कि यदि उन्हें लगता है कि उनकी टिप्पणी उचित है तो वे शास्त्रार्थ के लिए आगे आएं, अन्यथा आर्य समाज के समक्ष अपनी टिप्पणी पर पुनर्विचार करते हुए खेद व्यक्त करें।

— शास्त्रार्थ महारथी महेंद्र सिंह आर्य
अध्यक्ष, महर्षि दयानंद वेद संस्थान, बम्बावड़

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