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नोएडा की 'स्मार्ट सिटी' की हकीकत: बरौला बना तालाब, घुटनों तक गंदे पानी में स्कूल जाने को मजबूर मासूम, प्राधिकरण की लापरवाही पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

कुलदीप चौहान संवाददाता राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाईन टाइम्स नोएडा।

नोएडा। उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित और आधुनिक शहरों में गिने जाने वाले नोएडा की चमक-दमक के पीछे छिपी बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। सेक्टर-49 स्थित बरौला गांव में हुई मामूली बारिश ने नोएडा प्राधिकरण और जल विभाग के दावों की पोल खोल दी। पूरा गांव जलमग्न हो गया है। गलियां, सड़कें, बाजार और स्कूल जाने वाले रास्ते गंदे पानी से भर गए हैं, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

सबसे दर्दनाक दृश्य उन मासूम बच्चों का है, जो स्कूल की ड्रेस पहनकर घुटनों तक गंदे पानी में चलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कहीं एक पिता अपनी छोटी बच्ची को गोद में उठाकर पानी पार कर रहा है तो कहीं डिलीवरी कर्मी अपनी स्कूटी को पानी में धक्का देते नजर आ रहे हैं। दुकानों में पानी भरने से व्यापार भी ठप हो गया है और लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

ग्रामीणों का कहना है कि कभी बरौला गांव अपनी पहचान और सुविधाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन आज हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग कहने लगे हैं, "हमारा पुराना गांव ही बेहतर था।" करोड़ों रुपये के विकास कार्यों और स्मार्ट सिटी के दावों के बावजूद जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दे रही है। नालों की सफाई और जलभराव रोकने के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं।

इसी लापरवाही के विरोध में ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन कर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। विरोध के बाद प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर पहुंचे, हालात का निरीक्षण किया और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।

बरौला की यह भयावह तस्वीर सवाल खड़ा करती है कि यदि उत्तर प्रदेश के सबसे आधुनिक शहर का यह हाल है, तो आखिर विकास के दावे कितने वास्तविक हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जल निकासी, नालों की सफाई और सड़क सुधार का कार्य नहीं हुआ, तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।

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