मनोज तोमर ब्यूरो के राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाईन टाइम्स गौतम बुद्ध नगर।
ग्रेटर नोएडा/नोएडा। सामाजिक कार्यकर्ता ओमवीर सिंह आर्य एडवोकेट में जनहित के मुद्दे पर बाकी से अपनी राय रखते हुए बताया कि यमुना, ग्रेटर नोएडा और नोएडा प्राधिकरण द्वारा हाल के दिनों में अवैध कब्जों और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ लगातार बुलडोजर अभियान चलाए जा रहे हैं। कहीं 250 करोड़ रुपये तो कहीं 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा रहा है। इन कार्रवाइयों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सबसे अधिक नुकसान किसका हो रहा है? इसका जवाब है—उस आम नागरिक का, जिसने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी किसी डीलर या अवैध कॉलोनी के झांसे में आकर निवेश कर दी।
हर बार जब प्राधिकरण का बुलडोजर चलता है, तब केवल अवैध निर्माण ही नहीं टूटते, बल्कि कई परिवारों के सपने भी बिखर जाते हैं। वर्षों की मेहनत की कमाई देखते ही देखते मिट्टी में मिल जाती है और खरीदार हाथ मलते रह जाते हैं। अधिकांश मामलों में खरीदारों को यह जानकारी ही नहीं होती कि जिस जमीन पर वे निवेश कर रहे हैं, वह अधिसूचित क्षेत्र में है या नहीं, अथवा उस पर निर्माण वैध है या अवैध।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी भूखंड या प्लॉट को खरीदने से पहले संबंधित प्राधिकरण से उसकी वैधता की जांच करना बेहद जरूरी है। केवल डीलरों या आकर्षक विज्ञापनों के भरोसे लाखों रुपये का निवेश करना भविष्य में भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
दूसरी ओर, कई नागरिक यह सवाल भी उठाते हैं कि जब अवैध कॉलोनियों की शुरुआत होती है, उसी समय प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। कई स्थानों पर वर्षों तक प्लॉट बिकते रहते हैं, सड़कें बन जाती हैं, बिजली-पानी की व्यवस्था तक हो जाती है और लोग मकान भी बना लेते हैं। इसके बाद जब कॉलोनी पूरी तरह बस जाती है, तब बुलडोजर अभियान चलाया जाता है, जिससे सबसे अधिक नुकसान आम खरीदार को उठाना पड़ता है। ऐसे मामलों में समय रहते निगरानी और प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है।
साथ ही, कुछ लोग यह आरोप भी लगाते हैं कि कार्रवाई सभी अवैध कॉलोनियों पर समान रूप से नहीं होती और चयन को लेकर सवाल उठते हैं। ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पारदर्शी, समयबद्ध और समान नियमों के तहत कार्रवाई से जनता का विश्वास और मजबूत हो सकता है।
समाज के लिए संदेश
यदि आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा या यमुना प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले संबंधित प्राधिकरण से भूखंड की वैधता, स्वीकृत मानचित्र, भूमि की स्थिति और सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच अवश्य करें। केवल कम कीमत या डीलर के भरोसे निवेश न करें। थोड़ी-सी सावधानी आपकी जीवनभर की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है। साथ ही, प्राधिकरणों की भी जिम्मेदारी है कि अवैध कॉलोनियों को प्रारंभिक चरण में ही रोकें, ताकि आम नागरिकों को बाद में भारी नुकसान न उठाना पड़े।
0 टिप्पणियाँ