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नोएडा सेक्टर-92 में बायोडायवर्सिटी पार्क के विभाजन पर विरोध तेज, स्थानीय नागरिकों ने निर्माण रोकने की माँग उठाई

कर्मवीर आर्य संवाददाता राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाइन टाईम्स गौतमबुद्ध नगर।
नौएडा। नोएडा। सेक्टर-92 स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क में निर्माण कार्य और उसके विभाजन को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। यह पार्क लंबे समय से नोएडा के लिए “ग्रीन लंग्स” की भूमिका निभा रहा है और एनसीआर क्षेत्र पहले से ही गंभीर वायु प्रदूषण (ग्रेड-4) की स्थिति का सामना कर रहा है। ऐसे में इस प्रकार का निर्माण कार्य पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक माना जा रहा है।
स्थानीय निवासियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि प्राधिकरण द्वारा ग्रेड-4 प्रदूषण अवधि में भारी निर्माण गतिविधियाँ कराई गईं, कई पेड़ों की कटाई हुई और लगभग 75 एकड़ में फैले बायोडायवर्सिटी पार्क के क्षेत्रफल को कम कर दिया गया। नागरिकों ने इसे पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया।
प्रस्तावित ‘डियर पार्क’ के नाम पर इस क्षेत्र को विभाजित करने पर भी सवाल उठाए गए हैं। नागरिकों का कहना है कि हिरणों से संभावित बीमारियों का फैलाव, आसपास के रिहायशी इलाकों में दुर्गंध और प्राकृतिक पारिस्थितिकी असंतुलन जैसे मुद्दों पर न तो कोई सार्वजनिक जनसुनवाई हुई और न ही कोई पारदर्शी पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन प्रस्तुत किया गया।
सेक्टर-92, 93, 93-B, ग्राम गेझा, ओमेक्स फॉरेस्ट, ओमेक्स ग्रैंड, एटीएस ग्रीन, एल्डिको यूटोपिया सहित आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों ने प्रशासन से माँग की है कि निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए, ग्रेड-4 अवधि में किए गए कार्यों की स्वतंत्र जाँच हो, तथा पार्क को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए और भविष्य की किसी भी परियोजना में जनसुनवाई अनिवार्य की जाए।
इस प्रयास में मुख्य रूप से गौतम अवाना, प्रमोद शास्त्री, प्रमोद शर्मा, जयप्रकाश चौधरी, राजेश गोयल, सचे राम शर्मा, रिंकू भाटी, एस.के. शर्मा, ईश्वर चंद त्यागी, बिट्टू अवाना, नवनीत चौधरी सहित अनेक जागरूक नागरिक शामिल हैं।
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विरोध का नहीं, बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का विषय है।

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