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अंधों की लाठी और गूंगों की आवाज बनो पत्रकार बंधुओं । पवन लम्बरदार




पवन लम्बरदार : एक पत्रकार खबरों के लिए कितने जोखिम उठता हैं , कभी उसे  असमाजिक तत्वों से जूझना होता हैं और कभी प्रशासनिक भृष्ट व्यवस्था से और कभी राजनीतिक दाव पेंचों से। इस लड़ाई मे वो पिटता भी हैं , जलील भी होता हैं और अपने प्राणों की आहुति भी देता हैं। उसके बावजूद आज माहौल कुछ ऐसा हो गया हैं कि पत्रकारों को हीन दृष्टि से देखा जाता हैं।







राजनीतिज्ञ हो, प्रशासनिक अधिकारी हो या आम जनमानस उन्हें  लगता हैं जैसे समाज के सबसे बड़े शत्रु पत्रकार ही हैं। सबसे अजीब बात यह  है कि यही लोग उन्हीं पत्रकार बन्धुओं की वजह से मीडिया में नायक बनना चाहते हैं। ये लोग यह चाहते हैं कि उनके बारे में प्रतिदिन अधिक से अधिक चीजें प्रकशित हों ताकि मीडिया के माध्यम से वह सबके जेहन में बसे रहें।


पत्रकारों को हीन दृष्टि से देखने की सबसे बड़ी वजह यह है कि एक पत्रकार ही दूसरे पत्रकार के प्रति द्वेष भावना रखता हैं। और वर्तमान पत्रकारिता जगत में बिना पढ़े लिखें , अल्पज्ञानी और दिग्भ्रमितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है जो इस चीज को और मजबूती प्रदान करती है।
बात अजीब है लेकिन हमारे पत्रकार बंधु अपनी साख बढ़ाने व दूसरे पत्रकार बन्धु की छवि धूमिल करने में कोई कसर नही छोड़ते। वे अधिकारी , नेता या जनता सबके सामने तारीफ करते हैं कि वह पत्रकार नहीं है। सब फर्जी है। सौ-दो सौ रूपये में बिकने वाला दलाल है। कुछ पत्रकार बंधु तो इसमें इतना समय देते हैं कि लोगों को झूठ भी सत्य लगने लगता हैं।


उन्हें सोचना होगा वह भी पत्रकारिता रूपी वृक्ष की शाखाओं मे से हैं और जो भी वो बोल रहे हैं उसका प्रभाव उनके चरित्र पर भी पड़ेगा।


आज पत्रकार बदहाल है और लोगों की नजर में एक दलाल हैं तो उसके लिए वो खुद जिम्मेदार हैं। आज पत्रकार राजनेताओं और अधिकारियों के हाथों की कठपुतली बनकर नाच रहे हैं। 


दोस्तों नाचने ये बेईमान राजनेता और अधिकारी चाहिए जो दीमक की तरह देश को चाट रहे हैं। जो जनता के नौकर होकर जनता पर हुक्म चला रहे हैं। आप तो कलमकार हो , आप क्यो चमचागिरी करेंगे , दिखाओ हर थाने का सच , दिखाओ हर अधिकारी की काली कमाई , दिखाओ राजनेताओं की मक्कारी। नोएडा जैसे शहर मे जंहा थानों की कमाई रोजाना लाखो मे हैं वँहा के अधिकारियों की कमाई का अंदाजा लगाओ और दिखाओ काला सच दुनियां को। हर योजना मे होती धांधली , नशे का व्यापार , सट्टा और जेल भेजने से बचाने के लिए चल रहा मकड़जाल क्या आपको दिखाई नही पड़ता।


आपकी एकता को जंग लगा हैं आपकी कलम को नहीं। उगलने दो अंगारे कलम को , होने दो कलम का कागज से दंगा। 


समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका अपराध।





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