राष्ट्रीय दैनिक फ्यूचर लाईन टाइम्स।
संत संसद में अधिक गुरुकुल स्थापना और अनिवार्य नैतिक शिक्षा का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित।यूके, 8 अगस्त। संत संसद में जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए देश-विदेश में अधिक से अधिक गुरुकुलों की स्थापना तथा बच्चों के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल करने का आह्वान किया। प्रस्ताव को कार्यक्रम में उपस्थित संतों एवं महात्माओं ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया।
अपने संबोधन में स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी और रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक शिक्षा वह है जो व्यक्ति में ज्ञान के साथ त्याग, तपस्या, संस्कार और लोक-कल्याण की भावना विकसित करे। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि विश्व को आज भोगवादी नहीं, बल्कि योगवादी शिक्षा और संस्कृति की आवश्यकता है। अंग्रेजी सहित सभी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करने में कोई विरोध नहीं है, लेकिन आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी जड़ों, ज्ञान-विज्ञान की परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है।
स्वामी जी ने कहा कि गुरुकुल आधारित शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें चरित्रवान और संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे संजय गिरी सहित महंत नारायण गिरी महाराज, महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी महाराज, महामंडलेश्वर उमाकांतानंद महाराज, राजराजेश्वरानंद गुरुजी महाराज (पंडोखर सरकार), स्वामी रिशेश्वरानंद महाराज, पद्मश्री स्वामी धर्मेशानंद महाराज, निरंजन स्वामी और त्रिलोचन दास महाराज ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
समापन पर स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि संस्कार और नैतिक मूल्यों से जुड़ी शिक्षा ही समाज एवं आने वाली पीढ़ियों को बेहतर दिशा दे सकती है।
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