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" गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रम मे शिक्षिका सुमन शर्मा सम्मानित।


मनोज तोमर दैनिक फ्यूचर लाइन टाइम ब्यूरो चीफ गौतमबुद्धनगर 
ग्रेटर नोएडा।जेपी इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा के प्रांगण में भारत विकास परिषद् विवेकानन्द शाखा के सहयोग से 'गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और के अमूल्य योगदान का सम्मान करना और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सराहना था।कार्यक्रम में कक्षा 1 से 12 तक के बारह शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल आने वाले विद्यार्थियों  सहित सर्व  श्रेष्ठ सबसे शिक्षको  को सम्मानित किया गया। भारत विकास परिषद विवेकानन्द शाखा के अध्यक्ष विवेक अरोड़ा, और कार्यकारिणी सदस्य राखी अरोड़ा , एमिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, एमिटी विश्वविद्यालय के प्रो  विवेक कुमार और स्कूल की प्रधानाचार्य  रूबी चंदेल द्वारा सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त शिक्षण में असाधारण योगदान के लिए स्कूल की  शिक्षिकाओं - सुमन शर्मा, नेहा धामी तथा रीता जुत्शी को प्रतीक चिन्ह  सम्मान देकर सम्मानित किया गया । इस अवसर पर संस्थान की प्रधानाचार्या  रूबी चंदेल  ने को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में प्रगति करने के लिए तथा अव्वल आने के लिए उस क्षेत्र में पूरी लगन और निष्ठा के साथ कार्य करना आवश्यक होता है, जिसमें एक शिक्षक की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।कार्यक्रम के अंत में प्रो विवेक कुमार द्वारा विद्यार्थियों को अपने गुरुओं के प्रति आदर और कृतज्ञता की भावना विकसित करने हेतु शपथ भी दिलाई गई।कार्यक्रम ने सभी उपस्थित 1100 विद्यार्थियों और शिक्षकों पर गहरी छाप छोड़ी और प्रत्येक को अपने-अपने क्षेत्र में समर्पण और उत्कृष्टता की भावना को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया, श्रीमती सुमन शर्मा को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का सम्मान मिलने पर शिक्षा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है इस अवसर पर श्रीमती सुमन शर्मा जी के पति जाने-माने शिक्षा विद  एवं प्रेरक डॉ  एन सी शर्मा जो ग्लोबल इंस्टीट्यूट आफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी में सचिव भी  है। ने मीडिया में शिक्षकों के सम्मान के लिए प्रकाशित इस उपलब्धि हेतु मीडिया का आभार व्यक्त किया तथा कहा की वास्तविकता में शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके माध्यम से हम विद्यार्थियों को शिक्षित प्रशिक्षित करके सर्वश्रेष्ठ नागरिक बनाते हैं शिक्षकों का यह सम्मान यह दर्शाता है कि शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका आचार्य चाणक्य के समय से थी जो आज भी जारी है और आगे  आने  वाले भविष्य में भी जारी रहेगी उन्होंने सम्मान देने वाली संस्था का भी बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया।

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